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कहीं दगाबाजी तो नहीं कर रहे मुनीर? ईरान-US वार्ता के बीच उठे सवाल, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने किया अलर्ट

 Published : Apr 19, 2026 09:31 am IST,  Updated : Apr 19, 2026 09:31 am IST

अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत में बतौर मध्यस्थ पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर की भूमिका पर संदेह जताया है।

Asim munir and donlad trump- India TV Hindi
आसिम मुनीर और डोनाल्ड ट्रंप Image Source : AP

अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता के बीच अमेरिका की इंटेलिजेंस ने पाकिस्तान सेना प्रमुख आसिम मुनीर को डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के लिए संभावित खतरा बताया है। यह बात तब सामने आई है जबकि अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। फॉक्स न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान आर्मी चीफ आसीम मुनीर को ट्रंप प्रशासन के लिए रेड फ्लैग यानी खतरे का संकेत माना गया है। मुनीर के ईरान के टॉप सैन्य अधिकारियों के साथ पुराने सबंध अमेरिकी हितों के लिए खतरा पैदा सकते हैं। मुनीर के करीबी संपर्क में रहनेवालों में कुद्स फोर्स के कमांडर कासिम सुलेमानी और  IRGC के कमांडर होसैन सलामी जैसे कमांडर भी थे जिन्हें अमेरिकी हमले में मार दिया गया।

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अमेरिकी हितों को नुकसान की आशंका

हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से आसीम मुनीर की तारीफ की है और उन्हें अपना पसंदीदा फील्ड मार्शल कहा है, लेकिन इंटेलिजेंस अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि उनकी दोहरी भूमिका से अमेरिका के हितों को नुकसान पहुंच सकता है। एक बेवफा सहयोगी के तौर पर पाकिस्तान का इतिहास किसी से छिपा नहीं है। ओसामा बिन लादेन के मामले में उसकी भूमिका पहले भी सामने आ चुकी है।

पाकिस्तान से सावधान रहने की सलाह

फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज़ के बिल रोगियो ने फॉक्स न्यूज़ डिजिटल से कहा कि डोनाल्ड ट्रंप को पाकिस्तान से सावधान रहना चाहिए, और इसे अफगानिस्तान के मामले में ऐतिहासिक रूप से एक अविश्वसनीय सहयोगी बताया। उन्होंने आसिम मुनीर के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के साथ कथित संबंधों को अमेरिका के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बताया। विशेषज्ञों ने यह भी सुझाव दिया कि मुनीर ट्रंप के साथ अपने अच्छे संबंधों का इस्तेमाल चुपके से ईरान के हितों को आगे बढ़ाने के लिए कर सकते हैं, और साथ ही पाकिस्तान को एक ज़रूरी लेकिन अप्रत्याशित मध्यस्थ के तौर पर पेश कर सकते हैं।

पाकिस्तान में सरकार पर सेना हावी

पाकिस्तानी विश्लेषक रज़ा रूमी ने कहा कि मुनीर का इस पद तक पहुंचना इस बात को दिखाता है कि"पाकिस्तान में सेना लगातार सिविल नेतृत्व पर हावी होती जा रही है।"आलोचकों का कहना है कि जब से 2022 के आखिर में मुनीर सेना प्रमुख बने हैं, पाकिस्तान में राजनीतिक विरोधियों पर कार्रवाई तेज़ हो गई है, जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को हाशिए पर डालना भी शामिल है।

ट्रंप के करीबी हैं मुनीर

मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष के बाद मुनीर की अमेरिका से करीबी बढ़ गई थी। डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में मुनीर को आमंत्रित किया था। ईरान युद्ध में भी आसिम मुनीर एक मध्यस्थ के तौर पर अपनी भूमिका निभा रहे हैं। इस्लामाबाद में हुई पहले दौर की वार्ता हालांकि बेनतीजा रही, फिर भी दूसरे दौर की वार्ता की उम्मीद बंधी है। लेकिन अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की चेतावनी से ईरान और अमेरिका के बीच चल रही बातचीत में आसिम मुनीर की भूमिका पर सवाल और संदेह पैदा हो गया है।

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